जब तुम पास होती हो,
तो समय ठहर जाता है,
और धड़कनें
तुम्हारी साँसों की लय में बहने लगती हैं।
तुम्हारा हाथ जब
मेरे हाथ में सिमटता है,
तो लगता है जैसे
सारी दूरियाँ हार मानकर
हमारे कदमों में बिखर गई हों।
तुम्हारा स्पर्श
मेरे अस्तित्व पर उतरी कोई कोमल धूप है,
जो मेरी रूह के हर कोने को
जीवन से भर देता है।
जब तुम मेरे कंधे पर
अपना सिर रखती हो,
तो लगता है जैसे
पूरा आकाश मेरे भीतर उतर आया हो,
और मैं स्वयं में पूरा हो गया हूँ।
तुम्हारी साँसों की गर्माहट
मेरी गर्दन को छूकर
एक अनकही कविता लिख जाती है,
जिसे सिर्फ मेरा दिल पढ़ सकता है।
उस पल,
न शब्दों की ज़रूरत होती है,
न वादों की—
बस तुम्हारा होना ही
मेरे होने का प्रमाण बन जाता है।
तुम्हारी उँगलियों का
धीरे से मेरे हाथों में उलझ जाना,
जैसे दो नदियाँ
अपने सारे नाम भूलकर
एक ही समंदर बन गई हों।
तुम्हारे पास होने पर,
मेरी हर अधूरी साँस पूरी हो जाती है,
और मैं समझ जाता हूँ—
प्रेम सिर्फ देखा नहीं जाता,
उसे छूकर महसूस किया जाता है।
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